डॉ. परमानंद श्रीवास्तव (1935–2013) — हिन्दी आलोचक और कवि
परमानंद श्रीवास्तव 1935 – 2013
परमानंद श्रीवास्तव का लेखन-कक्ष {{ t.label }}
कमरे में
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1935 – 2013

जीवन

डॉ. परमानंद श्रीवास्तव हिन्दी आलोचना की उस पीढ़ी के लेखक थे जिसने समकालीन कविता को पढ़ने का सलीका गढ़ा। गोरखपुर ज़िले के बाँसगाँव में जन्मे, उन्होंने तत्कालीन आगरा विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम. ए. किया और अध्यापन को जीवनयापन का साधन बनाया।

पहले गोरखपुर के सेंट एंड्रयूज कॉलेज में, फिर गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में आचार्य। वे वहाँ प्रेमचंद पीठ के पहले निदेशक भी रहे। ‘आलोचना’ पत्रिका के सम्पादन में नामवर सिंह के सहयोगी रहे, और ‘साखी’ तथा प्रेमचंद साहित्य संस्थान से आजीवन जुड़े रहे।

कविता से लेखन का आरम्भ करने के बाद उन्होंने कहानी और डायरी में भी कलम चलायी, पर सर्वाधिक ख्याति आलोचना के क्षेत्र में मिली। उनकी आलोचना ने अपने समय की सर्जनात्मकता को खोजकर रेखांकित किया और कविता की परम्परा का पुनर्मूल्यांकन भी किया।

आलोचक के साथ-साथ वे कवि भी थे — यह बात उनके पाठकों को अक्सर बाद में पता चलती।

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कृतियाँ

आरम्भ कविता से, समारोप समीक्षा और आलोचना से।

कविता का अर्थात्
कविता का अर्थात्
आलोचना
आलोचना की संस्कृति
आलोचना की संस्कृति
आलोचना
आलोचना का रहस्यवाद
आलोचना का रहस्यवाद
आलोचना
समकालीन कविता : सम्प्रेषण का संकट
समकालीन कविता : सम्प्रेषण का संकट
आलोचना
अँधेरे समय में शब्द
अँधेरे समय में शब्द
आलोचना
शब्द और मनुष्य
शब्द और मनुष्य
आलोचना
उपन्यास का पुनर्जन्म
उपन्यास का पुनर्जन्म
आलोचना
जायसी
जायसी
भारतीय साहित्य के निर्माता
निराला
निराला
भारतीय साहित्य के निर्माता
चौथा शब्द
चौथा शब्द
कविता संग्रह
उजली हँसी के छोर पर
उजली हँसी के छोर पर
कविता संग्रह
अगली शताब्दी के बारे में
अगली शताब्दी के बारे में
कविता संग्रह
अतल का अन्तरीप
अतल का अन्तरीप
कविता संग्रह
रुका हुआ समय
रुका हुआ समय
कहानी संग्रह
समकालीन हिंदी आलोचना
समकालीन हिंदी आलोचना
सम्पादन
अन्धेर नगरी
अन्धेर नगरी
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र · सम्पादन
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तस्वीरें

परिजन, मित्र और सहयात्री

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स्मृति-आयोजन · राष्ट्रीय संगोष्ठी

परमानंद श्रीवास्तव : अवदान और महत्व

19 एवं 20 सितम्बर 2026

स्थल : राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर

आयोजन : प्रेमचन्द साहित्य संस्थान एवं ‘साखी’ पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में

डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव (1935–2013) हिन्दी साहित्य के जाने-माने आलोचक, कवि और गद्य लेखक रहे हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले के बाँसगाँव में जन्मे परमानन्द श्रीवास्तव ने तत्कालीन आगरा विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम. ए. की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अध्यापन कार्य को अपने जीवनयापन का साधन बनाया और गोरखपुर के सेण्ट एण्ड्रूज कालेज से अध्यापन प्रारम्भ किया। बाद में उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में आचार्य पद को सुशोभित किया। वे वहाँ प्रेमचन्द पीठ के पहले निदेशक भी रहे।

लेखक के रूप में डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव ने हिन्दी साहित्य के कई क्षेत्रों को अपना योगदान दिया। कविता से लेखन का प्रारम्भ करने के बाद उन्होंने कहानी, डायरी इत्यादि विधाओं में भी कलम चलायी; मगर सर्वाधिक ख्याति उन्हें हिन्दी आलोचना के क्षेत्र में मिली। कविता के क्षेत्र में उजली हँसी के छोर पर, अगली शताब्दी के बारे में, एक अनायक का वृत्तांत जैसी कृतियाँ उनकी काव्य-सर्जना का उदाहरण हैं। उन्होंने रुका हुआ समय और इस बार सपने में तथा अन्य कहानियाँ प्रभृति कहानी-संग्रह भी हिन्दी साहित्य को दिये। आलोचना जगत में उनकी प्रमुख कृतियाँ नयी कविता का परिप्रेक्ष्य, हिन्दी कहानी की रचना प्रक्रिया, कवि कर्म और काव्यभाषा, कविता का अर्थात, कविता का उत्तरजीवन, समकालीन कविता का यथार्थ और उपन्यास का पुनर्जन्म विशेष रूप से चर्चित रहीं।

इसके अतिरिक्त वे ‘आलोचना’ पत्रिका का सम्पादन भी करते रहे। ‘साखी’ पत्रिका और प्रेमचन्द साहित्य संस्थान से वे लगातार जुड़े रहे। अपने साहित्य-योगदान के लिए उन्हें बहुत से सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त हुए, जिनमें व्यास सम्मान, भारत भारती सम्मान और रामचन्द्र शुक्ल पुरस्कार प्रमुख हैं।

डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव की आलोचना ने न केवल अपने समय की सर्जनात्मकता को खोज कर रेखांकित किया, अपितु कविता की परम्परा को भी पुनर्मूल्यांकित किया। समकालीन कविता की यथार्थोन्मुखता को रेखांकित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने हिन्दी जगत को यह समझाने का प्रयास किया कि रचना अपने समय में तो अर्थपूर्ण होती ही है, अपने समय के बाद भी उसे नये-नये अर्थों में पढ़ा जाता है।

हिन्दी आलोचना में उनके अवसान के बाद एक गहरी रिक्ति पैदा हुई है — विशेषकर नयी रचनाओं और रचनाकारों को पहचानने और मूल्यांकित करने के परिप्रेक्ष्य में। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रेमचन्द साहित्य संस्थान एवं ‘साखी’ पत्रिका के संयुक्त तत्वावधान में ‘परमानन्द श्रीवास्तव का जीवन, कृतित्व और महत्व’ को लेकर दो दिन के कार्यक्रम की योजना बनायी जा रही है।

कार्यक्रम-विवरण
यशोधरा सभागार, राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर
शनिवार, 19 सितम्बर 2026
पंजीकरण : प्रातः 9 बजे से
प्रथम सत्र : उद्घाटन
प्रातः 10:30 से अपराह्न 12:30 तक
अध्यक्षतारामदेव शुक्ल
स्वागत वक्तव्यश्रुति श्रीवास्तव
बीज वक्तव्यसदानन्द शाही
उद्घाटन वक्तव्यशम्भुनाथ
साहचर्यनरेश सक्सेना  ·  कृष्णचन्द्र लाल  ·  अवधेश प्रधान  ·  ज्ञानवती श्रीवास्तव
संगोष्ठी की स्मारिका का लोकार्पण
रघुवंशमणि को परमानन्द श्रीवास्तव आलोचना-सम्मान
सम्मान-पत्र-वाचन : अन्विता श्रीवास्तव
रघुवंशमणि का संक्षिप्त वक्तव्य
राघवेन्द्र दुबे ‘भाऊ’ और अशोक चौधरी को बुद्धचर्या-सम्मान
धन्यवाद-ज्ञापनराजेश मल्ल
सत्र-संयोजनश्रुति कुमुद
चाय अन्तराल
विशेष सत्र
अपराह्न 12:30 से 1:00 तक
परमानन्द श्रीवास्तव स्मृति न्यास की वेबसाइट का उद्घाटन
वृत्तचित्र ‘गोधूलि के कवि परमानन्द श्रीवास्तव’ का प्रदर्शन · निर्माण : प्रदीप सुविज्ञ
भोजन अन्तराल : 1 से 2:30 बजे तक
द्वितीय सत्र
अपराह्न 2:30 से सायं 5 बजे तक  ·  विषय : परमानन्द श्रीवास्तव : जीवन और कृतित्व
अध्यक्षताअनन्त मिश्र
मुख्य वक्तव्यस्वप्निल श्रीवास्तव
विशिष्ट वक्तव्यप्रेमचन्द सिंह  ·  मुमताज़ ख़ान  ·  रविनन्दन  ·  मधुप कुमार  ·  प्रेमव्रत तिवारी  ·  नागेश राम त्रिपाठी  ·  ऊषा कुमार  ·  रंजना जायसवाल  ·  ऊषा श्रीवास्तव  ·  सीमा  ·  विभूति नारायण ओझा  ·  कौस्तुभ
सत्र-संयोजनपरम प्रकाश राय
धन्यवाद-ज्ञापनअपराजिता श्रीवास्तव
सम्मान-सत्र
सायं 6 बजे  ·  शम्भुनाथ को विमला देवी स्मृति सम्मान
अध्यक्षअरुण कमल
सम्मान्यशम्भुनाथ — संक्षिप्त वक्तव्य
साहचर्यसदानन्द शाही  ·  राजेश मल्ल
सत्र-संयोजनआनन्द कुमार पाण्डेय
बाहर से आये अतिथियों के लिए रात का भोजन 8 बजे से।
रविवार, 20 सितम्बर 2026
तृतीय सत्र : शोधपत्र-वाचन
प्रातः 9 से 10 बजे तक
विशेषज्ञराकेश रंजन  ·  किरन तिवारी
सत्र-समन्वयकश्रुति श्रीवास्तव (कानपुर)
चतुर्थ सत्र
प्रातः 10 से 1 बजे तक  ·  विषय : कविता की आलोचना और परमानन्द श्रीवास्तव
अध्यक्षताअरुण कमल
मुख्य वक्तव्यरघुवंशमणि
विशिष्ट वक्तव्यअष्टभुजा शुक्ल  ·  बोधिसत्व  ·  पंकज चतुर्वेदी  ·  रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव ‘परिचय दास’  ·  निशांत  ·  विशाल श्रीवास्तव
सत्र-संयोजनबृजराज
भोजन-अवकाश : 1 से 2 बजे तक
पंचम सत्र
अपराह्न 2 से सायं 4 बजे तक  ·  विषय : परमानन्द श्रीवास्तव की आलोचना — कथा एवं अन्य गद्य-विधाओं की पहचान
अध्यक्षताअवधेश प्रधान
वक्तव्यअनिल कुमार राय  ·  दीपक प्रकाश त्यागी  ·  विमलेश कुमार मिश्र  ·  श्रुति  ·  प्रेमशंकर  ·  रामनरेश राम  ·  श्रुति कुमुद
सत्र-संयोजनशिवांगी गोयल
समापन-सत्र
सायं 4 बजे से
समापन वक्तव्यअरुण कमल
अध्यक्षतानरेश सक्सेना
आभारसदानन्द शाही
संचालनविहाग वैभव
परमानन्द श्रीवास्तव स्मृति कविता-पाठ
सायं 5 बजे से
कविनरेश सक्सेना (अध्यक्ष)  ·  अरुण कमल  ·  अष्टभुजा शुक्ल  ·  स्वप्निल श्रीवास्तव  ·  बोधिसत्त्व  ·  रघुवंशमणि  ·  विशाल श्रीवास्तव  ·  विहाग वैभव  ·  शिवांगी गोयल
विचार-बिन्दु
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परमानन्द श्रीवास्तव स्मृति आलोचना सम्मान

डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव की स्मृति और आलोचनात्मक परम्परा को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से परमानन्द श्रीवास्तव स्मृति न्यास द्वारा प्रतिवर्ष यह सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। सम्मान स्वरूप ₹11,000 की धनराशि, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति-पत्र भेंट किया जाएगा। सम्मान समारोह आयोजित करने की ज़िम्मेदारी साखी फ़ाउंडेशन की होगी।

प्रथम सम्मान चयन समिति
अध्यक्ष : स्वप्निल श्रीवास्तव — वरिष्ठ कवि/लेखक, अयोध्या
सदस्य : डॉ. अनामिका — कवयित्री एवं लेखिका, नयी दिल्ली
सदस्य : प्रो. सदानन्द शाही — कवि एवं आलोचक, वाराणसी

चयनित आलोचक को यह सम्मान संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में प्रदान किया जाएगा।

सम्मान की घोषणा — स्वतंत्र चेतना, 1 सितम्बर 2026
स्वतंत्र चेतना, गोरखपुर · 1 सितम्बर 2026
पोस्टर
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स्मृति-पुस्तिका

संस्मरण

डॉ. परमानंद श्रीवास्तव से जुड़ी आपकी कोई स्मृति, भेंट, पत्र अथवा उनकी किसी रचना का प्रभाव — यहाँ लिखिए। यह पृष्ठ सबके लिए खुला है।

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प्राप्त स्मृतियाँ न्यास के पास सुरक्षित रहती हैं। प्रकाशन से पूर्व लेखक की अनुमति ली जाएगी।